धर्मेन्द्र अपनी बॉडी को फिट कैसे रखते है

1. धर्मेन्द्र उम्र में भी दमदार क्यों दिखते है

धर्मेन्द्र का नाम लेते ही एक मजबूत, दमदार और चार्मिंग व्यक्तित्व सामने आता है। उम्र भले ही 80 पार हो चुकी हो, लेकिन उनकी फिटनेस देखकर युवा भी दंग रह जाते हैं। फिल्मों में वे हमेशा एक्शन हीरो रहे और असल जिंदगी में भी वो उतने ही सक्रिय हैं। फिट दिखना महज लुक्स के लिए नहीं, बल्कि ये उनका जीवनशैली का हिस्सा है। धर्मेन्द्र मानते हैं कि शरीर को चलायमान और मन को शांत रखना ही असली सेहत है।

वो फिटनेस को फैशन की तरह नहीं अपनाते, बल्कि इसे जीवन का मूल मानते हैं। उनका मानना है कि अगर शरीर स्वस्थ है, तभी मन, विचार और जीवन में संतुलन बना रह सकता है। उन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन कभी हार नहीं मानी। आज भी वे खेतों में काम करते हैं, सुबह जल्दी उठते हैं और ताजगी से भरपूर दिन बिताते हैं। उनके जीवन की यही सादगी और अनुशासन उन्हें उम्र में भी जवान बनाए हुए है।

2. धर्मेन्द्र का देसी और संतुलित भोजन प्लान

धर्मेन्द्र का भोजन किसी डाइटिशियन द्वारा बनाया गया चार्ट नहीं है, बल्कि वह देसी भारतीय संस्कृति और गांव की रसोई पर आधारित है। उनका मानना है कि शरीर वही खुराक मांगता है जो प्रकृति देती है। इसलिए वे सीज़नल फल, सब्ज़ियां और घर का बना ताज़ा खाना ही खाते हैं। सुबह खाली पेट गुनगुना पानी, 5-6 भीगे बादाम, और कभी-कभी शहद-नींबू का पानी लेते हैं।

उनका दोपहर का खाना आमतौर पर रोटी, हरी सब्ज़ी, मूंग या मसूर की दाल और थोड़ा चावल होता है। वो ज्यादा तेल, मसाले और नमक से परहेज़ करते हैं। रात को हल्का भोजन जैसे मूंग की दाल, सब्ज़ी या खिचड़ी को प्राथमिकता देते हैं। वे दिन में दो बार फल भी खाते हैं – जैसे पपीता, संतरा, या सेब। उन्हें न तो पिज़्ज़ा पसंद है, न बर्गर – बल्कि छाछ, दही, और गुड़ जैसे पारंपरिक आहार उनकी पहली पसंद हैं। उनके लिए खाना पेट भरने के लिए नहीं, शरीर को पोषण देने के लिए होता है।

3. योग और प्राणायाम – उनका सबसे बड़ा फिटनेस हथियार

धर्मेन्द्र रोजाना योग और प्राणायाम करते हैं। वे इसे केवल व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मा और शरीर के बीच संतुलन मानते हैं। उनका रूटीन सुबह जल्दी शुरू होता है – 5 से 6 बजे के बीच। सबसे पहले वे कुछ मिनट शांति में बैठते हैं और फिर प्राणायाम करते हैं – जिसमें अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और कपालभाति प्रमुख हैं। इसके बाद वे 20-30 मिनट तक योगासन करते हैं – विशेषकर ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन आदि।

धर्मेन्द्र कहते हैं कि प्राणायाम से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और पूरे शरीर में ऑक्सीजन अच्छे से पहुंचती है, जिससे दिनभर ऊर्जा बनी रहती है। उन्होंने यह आदत फिल्मी जीवन में ही नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी पूरी तरह निभाई है। योग के ज़रिए उन्होंने न सिर्फ बॉडी को फिट रखा है, बल्कि तनाव, थकावट और नींद की समस्याओं को भी नियंत्रित किया है। उनका चेहरा, त्वचा और आंखें आज भी चमकदार हैं – ये योग और आंतरिक संतुलन का प्रमाण है।

4. गांव की सादा जीवनशैली से जुड़ाव

धर्मेन्द्र भले ही मुंबई में रहते हों, लेकिन उनका दिल आज भी गांव में बसता है। उन्होंने अक्सर इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें खेतों में काम करना, हल चलाना और मिट्टी से खेलना बहुत पसंद है। जब भी उन्हें समय मिलता है, वो अपने फार्महाउस पर जाते हैं, जहां वे खुद सब्ज़ियां उगाते हैं, गायों को चारा देते हैं और देसी तरीके से दिन बिताते हैं। गांव की यह सादा जीवनशैली उनके शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखती है।

गांव में उन्हें प्राकृतिक हवा, ताज़ा पानी और शुद्ध आहार मिलता है, जिससे शहरी प्रदूषण का असर कम होता है। वहां कोई मोबाइल की घंटी नहीं, कोई शोर नहीं – बस सुकून और प्रकृति। वे घंटों तक बग़ीचे में काम करते हैं, जिससे उनका शरीर हमेशा चलता रहता है। यही देसी और साधा जीवन उन्हें आज भी चुस्त-दुरुस्त बनाए हुए है। उनका मानना है कि “गांव की मिट्टी में जो ताकत है, वो किसी जिम में नहीं।”

5. जिम और भारी वर्कआउट नहीं, हल्की फिजिकल एक्टिविटी में भरोसा

धर्मेन्द्र कभी भी बॉडीबिल्डिंग या हैवी जिम एक्सरसाइज़ में विश्वास नहीं रखते। उनका मानना है कि बॉडी को फिट रखने के लिए शरीर को बस रोज़ चलाते रहना चाहिए। वह तेज़ वॉक, हल्के स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़, सीढ़ियां चढ़ना और फार्महाउस पर काम करना पसंद करते हैं। कई बार वे खेत में नंगे पांव टहलते हैं, जिससे उन्हें ज़मीन की ऊर्जा मिलती है और शरीर में संतुलन बना रहता है।

वे “होलिस्टिक फिटनेस” में यकीन रखते हैं — यानी शरीर, मन और आत्मा का सामंजस्य। धर्मेन्द्र कहते हैं कि अगर आप घंटों जिम में पसीना बहा रहे हैं लेकिन मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो आपकी सेहत अधूरी है। इसीलिए वो रोजाना कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर करते हैं, जिससे शरीर सक्रिय बना रहे, भले ही वो फार्महाउस में गायों को चारा देना हो या झील के किनारे टहलना। यही छोटे-छोटे लेकिन नियमित फिजिकल मूवमेंट उन्हें आज भी जवान बनाए रखते हैं।

6. आयुर्वेदिक आदतें और घरेलू नुस्खे

धर्मेन्द्र की दिनचर्या में आयुर्वेद का गहरा स्थान है। वे मानते हैं कि दवा से बेहतर देसी नुस्खे हैं, जो न सिर्फ शरीर को ठीक रखते हैं बल्कि रोगों से बचाव भी करते हैं। सुबह उठते ही वे गुनगुना पानी पीते हैं — कभी-कभी उसमें शहद और नींबू मिलाते हैं। इससे उनकी पाचन क्रिया सुधरी रहती है और शरीर डिटॉक्स होता है।

धर्मेन्द्र हल्दी वाला दूध, तुलसी की चाय और सोंठ के काढ़े जैसे पारंपरिक पेयों का भी सेवन करते हैं। सर्दियों में वे अदरक, गुड़ और घी के मिश्रण से इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। उन्हें आंवला बेहद पसंद है – जिसे वो या तो मुरब्बा के रूप में खाते हैं या आंवला जूस के रूप में।

वे कहते हैं कि हमारे दादी-नानी के नुस्खों में जो ताकत है, वो किसी सप्लीमेंट में नहीं मिलती। इन आयुर्वेदिक आदतों ने उन्हें लंबे समय तक बीमारियों से दूर रखा है और उनकी त्वचा और बालों की सेहत को भी बरकरार रखा है।

7. नींद का अनुशासन – जल्दी सोना, जल्दी उठना

धर्मेन्द्र फिट रहने के लिए नींद को सबसे बड़ा टॉनिक मानते हैं। उनका कहना है कि अगर नींद पूरी नहीं हुई, तो न आहार काम करेगा, न व्यायाम। वे रात को जल्दी सोने की कोशिश करते हैं, आमतौर पर 9:30 या 10 बजे तक। मोबाइल या टीवी को वे बिस्तर में ले जाना पसंद नहीं करते। इस कारण उन्हें नींद जल्दी आती है और गहरी नींद मिलती है।

सुबह वे 5 से 5:30 बजे के बीच जाग जाते हैं। नींद के बाद उनका चेहरा तरोताज़ा होता है, और मानसिक रूप से वे एकदम शांत और सकारात्मक महसूस करते हैं। धर्मेन्द्र का यह मानना है कि जितना समय आप नींद से चुराते हैं, उतनी ही जल्दी शरीर आपको थकावट और बीमारी में धकेल देता है।

गहरी नींद न सिर्फ शारीरिक ऊर्जा को बनाए रखती है, बल्कि हॉर्मोन बैलेंस और स्किन हेल्थ में भी मदद करती है। शायद यही कारण है कि धर्मेन्द्र की उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी त्वचा में गLOW बना रहता है।

8. पॉजिटिव सोच और मन की ऊर्जा

धर्मेन्द्र का व्यक्तित्व बेहद सकारात्मक और जीवंत है। उनका हंसमुख और जमीन से जुड़ा स्वभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य का आधार है। वो मानते हैं कि “मन स्वस्थ रहेगा तो शरीर भी साथ देगा।” यही कारण है कि वे रोज़ाना अच्छे विचार पढ़ते हैं, प्रकृति में समय बिताते हैं, और छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी ढूंढते हैं।

वो सोशल मीडिया पर अपने फार्महाउस की वीडियो, प्राकृतिक झीलों की तस्वीरें और पुराने गीत गाते हुए वीडियो साझा करते हैं। यह दर्शाता है कि वह जीवन को भरपूर जीते हैं और नकारात्मकता से दूर रहते हैं। धर्मेन्द्र कभी विवादों में नहीं पड़ते, न ही किसी से ईर्ष्या करते हैं।

वो फिल्में भी चुनते समय स्क्रिप्ट की सादगी और संदेश को महत्व देते हैं। उनका ये मानना है कि मन अगर सुकून में है, तो वही असली लक्ज़री है। उनकी पॉजिटिव सोच और हंसी-मजाक भरी बातें ही उनके मन को ऊर्जा देती हैं – और यही ऊर्जा उनके शरीर तक पहुंचती है।

9. हाइड्रेशन का महत्व – खूब पानी, नींबू पानी और नारियल पानी

धर्मेन्द्र अपने दिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करते हैं। वे मानते हैं कि शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे सरल लेकिन ज़रूरी आदत है। वे दिनभर पानी छोटे-छोटे घूंट में पीते रहते हैं और कभी-कभी उसमें तुलसी के पत्ते या नींबू की कुछ बूंदें डालते हैं। इससे शरीर में डिटॉक्स प्रक्रिया तेज़ होती है और ऊर्जा का स्तर बना रहता है।

उन्हें नारियल पानी भी पसंद है – विशेषकर गर्मियों में। नारियल पानी से शरीर को इलेक्ट्रोलाइट्स मिलते हैं और त्वचा में निखार आता है। इसके अलावा, वे ताजे फलों के जूस भी पीते हैं, जैसे – गाजर का रस, आंवला जूस, या बेल का शरबत।

वे चाय या कॉफी सीमित मात्रा में लेते हैं, और सॉफ्ट ड्रिंक्स से पूरी तरह दूरी बनाए रखते हैं। उनका कहना है कि पानी पीना एक आदत है और यही आदत पूरे शरीर की मशीनरी को चालू रखती है। यह हाइड्रेशन की आदत उनके शरीर को थकान और डिहाइड्रेशन से बचाकर एक्टिव बनाए रखती है।

10. फिल्मों से जुड़ाव और एक्टिंग में एनर्जी

धर्मेन्द्र आज भी फिल्मों से जुड़े हुए हैं – कभी एक्टिंग के ज़रिए, कभी गानों के या फिर सोशल मीडिया पोस्ट्स के माध्यम से। एक्टिंग उनके जीवन का हिस्सा है, और इससे उन्हें मानसिक ऊर्जा मिलती है। कैमरा के सामने आना, डायलॉग बोलना, और किरदार में ढलना — ये सब उन्हें अंदर से उत्साहित करता है।

भले ही अब उनकी फिल्में कम हों, लेकिन जब भी किसी स्क्रिप्ट में दम होता है, वे खुशी-खुशी काम करते हैं। फिल्मों से उनका जुड़ाव केवल पैसा कमाने के लिए नहीं है, बल्कि ये उनकी आत्मा को संतोष और सक्रियता देता है। एक उम्रदराज अभिनेता होने के बावजूद उनकी डायलॉग डिलीवरी, अंदाज़ और बॉडी लैंग्वेज आज भी उतनी ही दमदार है।

धर्मेन्द्र को एक्टिंग में उत्साह और ऊर्जा का स्रोत मिलता है। जब वे किसी रोल की तैयारी करते हैं, तो वे चलना-फिरना, पढ़ना और रिहर्सल करना शुरू कर देते हैं। इससे उनका शरीर स्वाभाविक रूप से गतिशील बना रहता है।

11. सोशल मीडिया पर सक्रियता – डिजिटल फिटनेस भी ज़रूरी

आज के युग में जहां बुज़ुर्ग सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं, वहीं धर्मेन्द्र इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर बेहद सक्रिय हैं। वे अपने फार्महाउस की झील, खेत, गाय, देसी भोजन और जीवन से जुड़ी बातें वीडियो और तस्वीरों के रूप में शेयर करते रहते हैं। इससे वो न सिर्फ अपने फैंस से जुड़े रहते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी अपडेटेड और एक्सप्रेसिव बने रहते हैं।

धर्मेन्द्र का यह सोशल मीडिया जुड़ाव बताता है कि वह समय के साथ चलना जानते हैं। इससे उनका दिमाग सक्रिय रहता है और टेक्नोलॉजी से जुड़ी नई चीज़ों को जानने का उत्साह भी बना रहता है। उनके पोस्ट्स में सादगी, भावनाएं और जीवन के प्रति सकारात्मकता झलकती है।

सोशल मीडिया के ज़रिए धर्मेन्द्र अपनी दिनचर्या, जीवनशैली और सोच को युवाओं तक पहुंचाते हैं। यह डिजिटल सक्रियता भी उनके फिटनेस मंत्र का हिस्सा बन चुकी है – जहां मन भी सक्रिय रहता है और सामाजिक जुड़ाव बना रहता है।

12. तनाव से दूरी – कभी किसी विवाद या गुस्से में नहीं फंसे

धर्मेन्द्र का व्यक्तित्व शांत और सौम्य है। उन्होंने अपने लंबे करियर में शायद ही कभी किसी विवाद में खुद को डाला हो। वो विवादों से दूर रहकर खुद पर ध्यान देना पसंद करते हैं। उनकी ज़िंदगी का सिद्धांत है: “जहां तनाव है, वहां ऊर्जा नहीं टिकती।”

धर्मेन्द्र कभी भी किसी अभिनेता, निर्देशक या राजनैतिक शख्सियत के खिलाफ गुस्से में बयान नहीं देते। उनकी यही शांति और सामंजस्य वाली सोच उन्हें मानसिक रूप से संतुलित रखती है। वो खुद को सकारात्मक लोगों, संगीत, खेतों और किताबों से जोड़ते हैं – जिससे मानसिक तनाव की कोई जगह नहीं बचती।

वे मानते हैं कि हर दिन एक तोहफा है, और उसे खुशी से बिताना चाहिए। उनका ये नजरिया ही उन्हें मानसिक शांति और अंदरूनी शक्ति देता है। तनाव और चिंता से दूरी उनके फिट रहने का गुप्त मंत्र है, जिसे युवा भी अपनाकर लाभ उठा सकते हैं।

13. देसी घी शुद्ध दूध और पारंपरिक भोज्य पदार्थों का सेवन

धर्मेन्द्र की डाइट में देसी घी और शुद्ध दूध का खास स्थान है। उनका मानना है कि ये दोनों चीजें अगर सही मात्रा और शुद्धता में ली जाएं, तो शरीर के लिए अमृत समान हैं। वे फार्महाउस पर खुद गायें पालते हैं, और उनका दूध और घी उपयोग करते हैं।

वे हर दिन थोड़ा-सा घी रोटी या दाल में मिलाकर खाते हैं। इससे जोड़ों में चिकनाई बनी रहती है और पाचन तंत्र भी मज़बूत रहता है। शुद्ध गाय का दूध वे कभी रात को गर्म करके लेते हैं, कभी उसमें हल्दी मिलाकर। उनका मानना है कि दूध से हड्डियों को ताकत मिलती है और शरीर की रिकवरी भी तेज़ होती है।

धर्मेन्द्र छाछ, दही, लस्सी, और गुड़ जैसे देसी पदार्थों को भी आहार में शामिल करते हैं। वे मानते हैं कि इन पारंपरिक भोजनों में जो पोषण है, वो किसी सप्लीमेंट में नहीं मिलता।

14. परिवार से जुड़ाव और भावनात्मक स्थिरता

धर्मेन्द्र अपने परिवार से बेहद जुड़े हुए हैं। उनके बेटों सनी और बॉबी देओल के साथ उनका गहरा संबंध है, और वे समय-समय पर परिवार के साथ बिताए पलों की झलक सोशल मीडिया पर भी दिखाते हैं। उनका यह जुड़ाव उन्हें भावनात्मक रूप से स्थिर रखता है।

वे अपने पोते-पोतियों से मिलना, बातें करना और उनके साथ समय बिताना पसंद करते हैं। धर्मेन्द्र कहते हैं कि परिवार के साथ बिताया गया समय मानसिक शांति और खुशी लाता है। बुज़ुर्गों के लिए यह भावनात्मक समर्थन बेहद ज़रूरी होता है – जिससे वे अकेलापन या अवसाद महसूस नहीं करते।

परिवार के बीच रहना उन्हें ऊर्जा देता है, और उनके जीवन में एक उद्देश्य बनाए रखता है। धर्मेन्द्र की यही पारिवारिक नज़दीकियां उनकी मानसिक मजबूती और फिटनेस का भी एक गुप्त स्रोत हैं।

15. निष्कर्ष उम्र बढ़ी पर ऊर्जा नहीं घटी – हर उम्र के लिए प्रेरणा

धर्मेन्द्र की फिटनेस केवल फिजिकल लेवल पर नहीं है, बल्कि उनका मन, सोच और जीवनशैली भी बेहद संतुलित और सकारात्मक है। उन्होंने साबित किया है कि उम्र बढ़ना कमजोरी नहीं, बल्कि अनुभव और संतुलन का चरण होता है। जहां आज की युवा पीढ़ी जिम, सप्लीमेंट और क्रैश डाइट में उलझी हुई है, वहीं धर्मेन्द्र सरल और देसी जीवनशैली से फिट बने हुए हैं।

उनका उदाहरण यह बताता है कि अगर हम प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और सकारात्मक सोच को अपनाएं, तो उम्र का कोई असर शरीर पर नहीं दिखेगा। योग, प्राणायाम, गांव की हवा, ताजगी, परिवार से जुड़ाव और संतुलन – यही धर्मेन्द्र के फिटनेस का रहस्य है।

उनकी ज़िंदगी हर उम्र के पुरुषों और महिलाओं के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। वे एक चलते-फिरते उदाहरण हैं कि सादगी में भी ताकत होती है और फिटनेस दिल से आती है न कि जिम

Leave a Comment